Washing dishes with ash — Chemicals free life style
आज के दौर में जब हम ‘सस्टेनेबल लिविंग’ (Sustainable Living) और ‘जीरो वेस्ट’ (Zero Waste) की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान महंगे विदेशी उत्पादों की ओर जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी दादी-नानी के समय में बर्तनों को चमकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली ‘राख’ वास्तव में एक वैज्ञानिक चमत्कार थी?
अक्सर आधुनिक समाज में राख से बर्तन धोना पिछड़ेपन या गरीबी की निशानी मान लिया जाता है। लेकिन 2026 के इस दौर में, जहाँ हम रसायनों के दुष्प्रभावों से जूझ रहे हैं, विज्ञान यह सिद्ध कर रहा है कि यह प्राकृतिक क्लींजर किसी भी आधुनिक डिशवॉश बार से कहीं अधिक प्रभावी और सुरक्षित है।
राख का रसायन विज्ञान: यह कैसे काम करती है?

जब हम लकड़ी जलाते हैं, तो पीछे बची हुई सफेद या धूसर राख केवल कचरा नहीं होती। इसमें मुख्य रूप से पोटेशियम कार्बोनेट (K2CO3) होता है, जिसे ‘पोटाश’ भी कहा जाता है।
1. सैपोनिफिकेशन (Saponification) की प्रक्रिया:
विज्ञान की भाषा में कहें तो जब राख को पानी और बर्तनों पर लगे तेल या घी (वसा) के साथ मिलाया जाता है, तो एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिसे ‘सैपोनिफिकेशन’ कहते हैं। यह वही प्रक्रिया है जिससे साबुन बनाया जाता है। सरल शब्दों में, राख बर्तनों की चिकनाई के साथ मिलकर सतह पर ही ‘प्राकृतिक साबुन’ बना देती है, जिससे ग्रीस आसानी से निकल जाती है।
2. सोखने की शक्ति (Abrasive Nature):
राख के कण सूक्ष्म रूप से खुरदरे होते हैं। यह एक सौम्य ‘स्क्रबर’ का काम करते हैं जो जले हुए खाने के कणों को बर्तन की सतह को नुकसान पहुँचाए बिना हटा देते हैं। पारंपरिक बर्तन सफाई की यह विधि स्टील, पीतल और लोहे के बर्तनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
आधुनिक डिशवॉशर VS लकड़ी की राख
| विशेषता | आधुनिक लिक्विड/बार | लकड़ी की राख |
|---|---|---|
| सामग्री | SLS, पैराबेंस, कृत्रिम सुगंध | पोटेशियम, कैल्शियम, सूक्ष्म खनिज |
| पर्यावरण पर प्रभाव | जल प्रदूषण (फास्फेट के कारण) | मिट्टी के लिए खाद का काम करती है |
| स्वास्थ्य | त्वचा में जलन की संभावना | पूरी तरह सुरक्षित और जीवाणुरोधी |
| लागत | महंगी और बार-बार खरीदनी पड़ती है | शून्य लागत (बाय-प्रोडक्ट) |
राख से बर्तन धोने के आश्चर्यजनक लाभ
1. रसायनों से मुक्ति:
बाजार में मिलने वाले अधिकांश डिशवॉशिंग लिक्विड में ‘सोडियम लॉरिल सल्फेट’ (SLS) होता है। यदि बर्तन ठीक से न धोए जाएं, तो इन रसायनों की एक पतली परत बर्तनों पर रह जाती है, जो खाने के साथ हमारे शरीर में प्रवेश करती है। राख से बर्तन धोना आपको इन अदृश्य खतरों से बचाता है।
2. पानी की भारी बचत:
केमिकल वाले साबुन झाग बहुत छोड़ते हैं, जिसे साफ करने के लिए ढेर सारे पानी की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, राख बहुत कम पानी में साफ हो जाती है, जो जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
3. बर्तनों की लंबी उम्र:
विशेष रूप से लोहे (Cast Iron) और मिट्टी के बर्तनों के लिए राख सबसे अच्छी है। यह लोहे के बर्तनों को जंग से बचाती है और मिट्टी के बर्तनों के प्राकृतिक छिद्रों को बंद नहीं करती, जिससे उनकी ‘ब्रीदिंग’ क्षमता बनी रहती है।
राख का सही उपयोग कैसे करें?
यदि आप अपनी जीवनशैली में इस प्राकृतिक क्लींजर को शामिल करना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:
- राख का चयन: हमेशा लकड़ी की सफेद राख का उपयोग करें। कोयले की राख का उपयोग न करें, क्योंकि उसमें भारी धातुएं हो सकती हैं।
- छानना जरूरी: राख को बारीक छलनी से छान लें ताकि लकड़ी के मोटे टुकड़े या कीलें निकल जाएं।
- पेस्ट बनाएं: सूखी राख को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय, थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। इससे सफाई आसान हो जाती है।
- नींबू का साथ: यदि बर्तनों में ज्यादा बदबू (जैसे मछली या अंडा) है, तो राख के साथ थोड़ा नींबू का रस मिला लें। यह बेहतरीन पारंपरिक बर्तन सफाईका अनुभव देगा।
राख पर्यावरण के लिए वरदान
2026 में हमारी सबसे बड़ी चुनौती कचरा प्रबंधन है। जब हम रसायनों का उपयोग करते हैं, तो वह पानी नदियों और तालाबों में जाकर जलचरों को नुकसान पहुँचाता है। लेकिन राख से धुले बर्तनों का पानी सीधे आपके बगीचे में जा सकता है। राख में मौजूद पोटेशियम पौधों के लिए एक उत्कृष्ट उर्वरक (Fertilizer) का काम करता है। यह ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ का सबसे सरल उदाहरण है।
“प्रकृति के पास हमारी हर समस्या का समाधान है, बस हमें अपनी जड़ों की ओर देखने की जरूरत है।”
राख से बर्तन धोना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक सचेत चुनाव (Conscious Choice) है। यह विज्ञान, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संगम है। आधुनिकता का अर्थ केवल नई चीजों को अपनाना नहीं, बल्कि अपनी पुरानी और प्रभावी परंपराओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पुनर्जीवित करना भी है।
यदि आप भी एक स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त भविष्य की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं, तो अगली बार जब आप चूल्हा जलाएं या हवन करें, तो उस राख को फेंकने के बजाय उसे अपने किचन का हिस्सा बनाएं।

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FAQs
प्रश्न 1: क्या राख से बर्तन धोने से हाथों की त्वचा खराब हो जाती है?
नहीं, बल्कि राख में एंटी-सेप्टिक गुण होते हैं। हालांकि, यदि आपकी त्वचा बहुत अधिक संवेदनशील है, तो आप दस्ताने पहन सकते हैं। राख पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसमें कोई कठोर सिंथेटिक रसायन नहीं होते।
प्रश्न 2: क्या हम नॉन-स्टिक बर्तनों पर राख का उपयोग कर सकते हैं?
नहीं। राख से बर्तन धोना स्टील, लोहा, एल्युमीनियम और मिट्टी के बर्तनों के लिए उपयुक्त है। नॉन-स्टिक बर्तनों की टेफ्लॉन कोटिंग नाजुक होती है, जिसे राख के सूक्ष्म कण खुरच सकते हैं।
प्रश्न 3: क्या राख कीटाणुओं को मार सकती है?
हाँ, राख का pH स्तर क्षारीय (Alkaline) होता है, जो कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में सक्षम है। प्राचीन काल से ही इसका उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता रहा है।
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